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क्या आप करते है सुबह से उठकर यह काम / धन लक्ष्मी एवं तरक्की के लिए सुबह से उठकर अवश्य करे

क्या आप करते है सुबह से उठकर यह काम / धन लक्ष्मी एवं तरक्की के लिए सुबह से उठकर अवश्य करे 

 क्या आप करते है सुबह से उठकर यह काम / धन लक्ष्मी एवं तरक्की के लिए सुबह से उठकर अवश्य करे

 हमें  सुबह से उठकर उन कामों  को सबसे पहले करना चाहिए जो हमारे सनातन धर्म में हमें बताये गए है इनके करने से ना सिर्फ हमारा दिन मंगलमय होता है अपितु लक्ष्मी जी कृपा भी प्राप्त होती है हेलो दोस्तों आप सभी का स्वागत है मधुर भक्ति में
आज आप जानेगे के कैसे हम भी अपने दिनचर्या मैं उन शुभ कामों को जोड़कर और भी अच्छा दिन बना सकते हैं तो चलिए जानते हैं उन कामों के बारे में जिसे हमें सबसे पहले उठते ही करना चाहिए अगर आप हर रोज इन कामों को करेंगे तो आप के सारे काम बनने लगेंगे  जीवन में तरक्की होने लगी है और आप देखो गे की  धन लक्ष्मी का  आगमन आपके घर में सुताई  होने लागा क्योंकि स्वयं हमारे बड़े ऋषि-मुनियों इनका अनुसरन करते है और इनका धार्मिक ग्रंथों में भी उल्लेख बताया गया है

1-करदर्शन

करदर्शन सुबह से उठकर  ही शयन-शय्यापर सर्वप्रथम करतल (दोनों हाथोंकी हथेलियों)-के दर्शनका विधान है। करतलका दर्शन करते हुए निम्नलिखित श्लोकका पाठ करना चाहिये

                                               कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। 
                                              करमूले स्थितो ब्रह्मा, प्रभाते करदर्शनम्॥    

इस श्लोकमें धनकी अधिष्ठात्री लक्ष्मी, विद्याकी अधिष्ठात्री सरस्वती तथा कर्मके अधिष्ठाता ब्रह्माकी स्तुति की गयी है। इस मन्त्रका आशय है कि मेरे कर (हाथ)के अग्रभागमें भगवती लक्ष्मीका निवास है, कर (हाथ)के मध्यभागमें सरस्वती तथा कर (हाथ)-के मलभागमें ब्रह्मा निवास करते हैं। प्रभातकालमें मैं हथेलियों में इनका दर्शन करता हूँ। इससे धन तथा विद्याकी प्राप्तिके साथको साथ कर्तव्यकर्म करनेकी प्रेरणा प्राप्त होती है।  वेदव्यासने करोपलब्धि को मानवका. परम लाभ माना है। भगवान ने  हमें विवेकशक्ति इसलिये प्रदान की है  जिससे हम अपने हाथों से सदा सत्कर्म करते रहें। दोनों हाथों की हथेलियों के दर्शनका विधान का  आशय यह भी है कि प्रात:काल उठते ही दृष्टि ती कहीं और न जाकर अपने करतलमें ही देवदर्शन करे, है। जिससे वृत्तियाँ भगवच्चिन्तनकी ओर प्रवृत्त हों, और साथ ही बुद्धि सात्त्विक बनी रहे तथा पूरा दिन शुभ कार्यों में बीते।

2-भूमिवन्दना  


 भूमिवन्दना  करदर्शन  करने के बाद हमें पृथ्वी  पर पैर रखने से पहले पृथ्वीमाताकी वन्दना करनी चाहिये ।
 पृथ्वी सबकी माता हैं, धरित्री हैं, उन्होंने सबको धारण कर रखा है, वे सभीके लिये पूज्य हैं, वन्द्य हैं तथा आराधनाके योग्य हैं
 भगवान विष्णुकी दो पत्नियाँ हैं 1- महादेवी लक्ष्मी (श्रीदेवी) तथा दूसरी हैं 2- भूदेवी (पृथ्वी)। निद्रा-परित्याग के बाद  हमें अपने शयन के आसन से भूमिपर उतरना है तो   पाँव रखना पड़ेगा और अपनी माताके ऊपर कौन ऐसा है,  जो पाँव रखेगा? परंतु पाँव रखे बिना आगे के  कार्य होना असम्भव हैं। अतः इसी विवशताके कारण  पृथ्वीमाताकी सर्वप्रथम वन्दना की जाती है और निम्नलिखित प्रार्थनाके द्वारा उनसे क्षमा माँगी जाती है, भूमिपर पाँव रखनेसे पूर्व निम्न श्लोक पढ़ना चाहिये

                                     समुद्रवसने देवि पर्वतस्तन्मण्डले। 
                                     रतल विष्णुपनि नमस्तुभ्यं पादस्पर्श क्षमस्व मे॥

इसका भाव यह है कि हे पृथ्वीदेवि! आप करना समुद्ररूपी वस्त्रोंको धारण करनेवाली हैं, पर्वतरूपी स्तनोंसे सुशोभित हैं तथा भगवान् विष्णुकी आप पत्नी हैं,आपको नमस्कार है, मेरे द्वारा होनेवाले पादस्पर्शके लिये आप मुझे क्षमा करें। 

 3-मंगल-दर्शन 

प्रातः-जागरणके बाद यथासम्भव सर्वप्रथम मांगलिक वस्तुएँ गौ, तुलसी, पीपल, गंगा, देवविग्रह आदि का दर्शन करना चाहिये इनसे दिन शुभ होता हैं


 4- गुरुजनों  को प्रणाम करना 

प्रणाम  करने वाले तथा नित्य वृद्ध पुरुषोंकी सेवा करनेवाले पुरुषकी आयु, विद्या, कीर्ति और शक्ति (बल) इन चारों की वृद्धि होती है। अपने दोनों हाथों को एक दूसरे पर रखते हुए दाहिने हाथसे दाहिने पैर का तथा बायें हाथ से बायें पैर का स्पर्श करता हुआ  प्रणाम करे। विज्ञानकी दृष्टिसे मनुष्यके शरीर में रहने वाली विद्युत्-शक्ति पृथ्वी के आकर्षण द्वारा आकृष्ट होकर पैरों से निकलती रहती है। दाहिने हाथसे दाहिने पैर और बायें हाथसे बायें पैरका स्पर्श करने पर वृद्ध पुरुषके शरीर की  विघुत-शक्तिका प्रवेश प्रणाम करने वाले पुरुषके शरीर में सुगमता से हो जाता है। इस  विघुत-शक्ति के साथ वृद्ध पुरुषके ज्ञानादि सद्गुणों का भी प्रवेश हो जाता है।  विघुत-शक्ति मुख्यरूप से पैरों द्वारा  निकलती है, इसलिये पैर ही छुए जाते हैं, सिर आदि नहीं। वृद्ध पुरुषों को नित्य प्रणाम करनेसे वे प्रसन्न होकर अपने है दीर्घ कालीन जीवनमें सम्पादन किये हुए ज्ञान का दान प्रणाम  करने वाले को देते हैं। इस प्रकार ज्ञान-दानद्वारा प्रत्यक्ष रूप में  और  विघुत-शक्ति -प्रवेशद्वारा अप्रत्यक्ष रूप में उनके गुणों की
प्राप्ति प्रणाम करने वाले व्यक्तिको प्राप्त हो जाती है।

 5-भगवान तथा महापुरुषोंका स्मरण

प्रात:काल उठनेके बाद शौचादि कृत्यसे निवृत्त होकर अथवा इसके पूर्व हाथ, मुँह धोकर कपड़े बदलकर अपने इष्टदेवका, देवताओंका तथा महापुरुषोंका स्मरण तथा उनकी प्रार्थना करनी चाहिये।

 सुबह से उठ कर अगर आप इनसब का पालन करते है तो जीवन का बहुत कल्याण  होता हैं और  निम्न कार्य सिद्ध होते हैं जैसे दिन अच्छा बीतता है,  दुःस्वप्न, कलिदोष, शत्रु, पाप और  भय का नाश होता है, विषका भय नहीं होता धर्मकी वृद्धि होती है, अज्ञानीको ज्ञान प्राप्त होता है,  रोग नहीं होता,  पूरी आयु मिलती है,  विजय प्राप्त होती है,  निर्धन धनी होता है,  भूख-प्यास और काम की बाधा नहीं होती तथा  सभी  बाधाओं से छुटकारा मिलता है  इसके साथ ही स्वयं में दैवी गुणोंका आधान तथा महापुरुषों के गुणों को जीवनमें धारण करनेकी प्रेरणा मिलती है 
                                                                           राधे राधे 


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