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krishna avatar कृष्णावतार की कथा सम्पूर्ण अद्भुत जीवन लीला कृष्ण की

 कृष्ण अवतार भगवान की ऐसी कहानी है जिसमें भगवान कृष्ण अपनी लीलाओ से सभी का मन जीत लेते है  और उनके अद्भुत प्रसंग सुनने के लिए उनके भक्त बड़ा ही लालायित रहते है तो आ सभी के लिए कृष्ण अवतार की कथा इसका पाठ करने से जीवन धन्य होता है  


krishna avatar कृष्णावतार की कथा सम्पूर्ण अद्भुत जीवन लीला कृष्ण की

     ॐ गणपतये नमः ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः                                                     कृष्ण अवतार

 शूरसेन नाम के एक राजा थे। शूरसेन के पुत्र वसुदेव विवाह करके अपनी पत्नी देवकी के साथ घर जानेके लिये रथपर सवार हुए। उग्रसेनका लड़का था कंस। वह अपनी चचेरी बहिन देवकीको प्रसन्न करनेके लिये स्वयं ही रथ हाँकने लगा। जिस समय कंस रथ हाँक रहा था, उस समय आकाशवाणीने उसे सम्बोधित करके कहा-'अरे मूर्ख! जिसको तू रथमें बैठाकर लिये जा रहा है, उसकी आठवें गर्भकी सन्तान तुझे मार डालेगी।' कंस बड़ा पापी था। आकाशवाणी सुनते ही वह देवकीको मारनेके लिये तैयार हो गया। अन्तमें वसुदेवने देवकीके पुत्रोंको उसे सौंपनेका वचन देकर देवकीकी रक्षा की।  तत्पश्चात् कंसने देवकी और वसुदेवको कैद कर लिया। उन दोनोंसे जोजो पुत्र होते गये, उन्हें वह मारता गया। किंतु भगवान के  विधानको भला कौन रोक सकता है? आखिर वह समय आ ही गया। देवकीके गर्भसे जगत के तारनहार नारायणने श्रीकृष्णके रूपमें अवतार लिया। 
भगवान के  जन्म लेते ही योगमायाकी प्रेरणासे कारागार खुल गया। वसुदेवजी बालकृष्णको सूपमें रखकर गोकुल चल दिये। रास्तेमें यमुनाजी प्रभुका चरण छूनेके लिये व्याकुल हो गयीं। अन्तर्यामी बाल-प्रभु यमुनाके मनकी बात समझ गये। उन्होंने अपने चरण-स्पर्शसे यमुनाकी व्यथाको दूर किया। वसुदेवने नन्दबाबाके घर जाकर अपने पुत्रको यशोदाजीके पास सुला दिया। उनकी नवजात कन्या लेकर वे कारागारमें लौट आये।
बालक श्रीकृष्णको पाकर नन्द और यशोदाकी प्रसन्नताका ठिकाना न रहा। यशोदाको पुत्र हुआ है, यह सुनते ही पूरे गोकुलमें आनन्द छा गया। वहाँ भगवान् अपनी बाललीलासे यशोदाको नित्य रिझाते रहते थे। उनकी वंशीकी धुनपर सभी मोहित हो जाते थे। गोपियोंके घरोंसे माखन चुरानेके कारण वे माखनचोर कहलाये। श्रीकृष्णने बचपनमें ही खेल-खेलमें पूतना, बकासुर, तृणावर्त आदिका विनाश किया। एक उँगलीपर गोवर्धन पर्वत उठाकर इन्द्रका घमण्ड चूर कर दिया।
एक दिन भगवान् अपनी मित्र-मण्डलीके साथ गेंद खेल रहे थे। गेंद यमुनामें गिर गयी। बालक श्रीकृष्ण गेंद निकालनेके लिये यमुनामें कूद पड़े। यमुनामें कालिय नाग रहता था। भगवान् उसका मान-मर्दनकर उसके फणपर नृत्य करने लगे। इस प्रकार भगवान्ने छोटी-अवस्थामें अनेक लीलाएँ कीं
कछ समय बाद श्रीकृष्ण अक्रूरके साथ गोकुलसे मथुरा आये। वहाँ उन्होंने अपने परम भक्त सुदामा, माली और कुब्जा आदिपर कृपा की। तदनन्तर भगवान्ने लीलामात्रसे कंस आदि असुरोंका संहार कर अपने माता-पिताको बन्धनसे छुड़ाया। युद्धके मैदानमें अर्जुनको धर्म, कर्म और शाश्वत सत्यका उपदेश दिया। भगवान का  वह अमर संदेश गीताके रूपमें आज भी जन-जनका कल्याण कर रहा है।
   लीलापुरुषोत्तम भगवान् श्रीकृष्णको हम सब नमस्कार करते हैं।

     कृष्ण अवतार कथा संपूर्ण 

                                                         राधे राधे 

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