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पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा एवं व्रत करने से लाभ:Glory and fasting of Papankusha Ekadashi fast

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा एवं व्रत करने से लाभ:Glory and fasting of Papankusha Ekadashi fast  

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा एवं व्रत करने से लाभ:Glory and fasting of Papankusha Ekadashi fast
पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा एवं व्रत करने से लाभ:Glory and fasting of Papankusha Ekadashi fast  


श्री राधे 
पापांकुशा एकादशी व्रत आश्विन माह  के शुक्लपक्ष में पड़ता है इस व्रत की महिमा अपार  है जो इसे करता है उस का जीवन सफल हो जाता है इस व्रत का अनुष्ठान करने वाले भक्तों पर श्री हरी की कृपा हमेशा साथ रहती है और उसे सारे पाप  पापांकुशा एकादशी व्रत को रखने से ख़त्म हो जाते है 

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा
ऐसी इस व्रत की महिमा है पद्म पुराण में इस प्रकार पापांकुशा एकादशी का व्रत बताया गया है 
एक समय युधिष्ठिर ने पूछा-मधुसूदन ! अब कृपा करके यह बताइये कि आश्विन के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है?
भगवान् श्रीकृष्ण बोले-राजन्! आश्विन के शुक्लपक्ष मे जो एकादशी होती है, वह 'पापांकुशा' के नामसे विख्यात है। 

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा
वह सब पापों को हरनेवाली तथा उत्तम है। उस दिन सम्पूर्ण मनोरथकी प्राप्ति के लिये मनुष्यों को स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाले पद्मनाभसंज्ञक मुझ वासुदेवका पूजन करना चाहिये। जितेन्द्रिय मुनि चिरकालतक कठोर तपस्या करके जिस फलको प्राप्त करता है, वह उस दिन भगवान् गरुड़ध्वजको प्रणाम करनेसे ही मिल जाता है। पृथ्वीपर जितने तीर्थ और पवित्र देवालय हैं, 

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा
उन सबके सेवनका फल भगवान् विष्णुके नामकीर्तनमात्रसे मनुष्य प्राप्त कर लेता है। जो शार्ङ्गधनुष धारण करने वाले सर्वव्यापक भगवान् जनार्दन की  शरण में जाते हैं, उन्हें कभी यमलोक की यातना नहीं भोगनी पड़ती। यदि अन्य कार्य के प्रसङ्ग से भी मनुष्य एकमात्र एकादशी को उपवास कर ले तो उसे कभी यम-यातना नहीं प्राप्त होती। जो पुरुष विष्णुभक्त होकर भगवान् शिव शंकर की निन्दा करता है, वह भगवान् विष्णु के लोक में स्थान नहीं पाता; 

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा
उसे निचय ही नरकमें गिरना पड़ता है। इसी प्रकार यदि कोई  शिव भक्त  होकर भगवान् विष्णु की निन्दा करता है तो वह घोर रौरव नरक में डालकर तबतक पकाया जाता है, जबतक कि चौदह इन्द्रों की आयु पूरी नहीं हो जाती इसलिय ऐसा कभी भी भूल कर नहीं करना चाहिए  यह एकादशी स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, शरीर को नीरोग बनाने वाली तथा सुन्दर स्त्री, धन एवं मित्र देनेवाली है। 

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा
राजन् ! एकादशी को दिनमें उपवास और रात्रि जागरण करनेसे अनायास ही विष्णुधामकी प्राप्ति हो जाती है। राजेन्द्र ! वह पुरुष मातृ-पक्षकी दस, पिताके पक्षकी दस तथा स्त्रीके पक्षकी भी दस पीढ़ियोंका उद्धार कर देता है। एकादशी व्रत करनेवाले मनुष्य दिव्यरूपधारी, चतुर्भुज, गरुड़की ध्वजासे युक्त, हार  से सुशोभित और पीताम्बरधारी होकर भगवान् भगवान् विष्णुके धामको जाते हैं।

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा
आश्विनके शुक्लपक्षमें पापाङ्कशाका व्रत करनेमात्रसे ही मानव सब पापोंसे मुक्त हो श्रीहरिके लोकमे जाता है। जो पुरुष सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छातेका दान करता है, वह कभी यमराजको नहीं देखता। नृपश्रेष्ठ ! दरिद्र पुरुषको भी चाहिये कि वह यथाशक्ति नानदान आदि क्रिया करके अपने प्रत्येक दिनको सफल बनावे।  जो होम, नान, जप, ध्यान और यज्ञ आदि पुण्यकर्म करनेवाले हैं, उन्हें भयंकर यमयातना नहीं देखनी पड़ती। 

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा
लोकमें जो मानव दीर्घायु, धनाढ्य, कुलीन और नीरोग देखे जाते हैं, वे पहलेके पुण्यात्मा है। पुण्यकर्ता पुरुष ऐसे ही देखे जाते हैं। इस विषयमें अधिक कहनेसे क्या लाभ, मनुष्य पापसे दुर्गतिमें पड़ते हैं और धर्मसे स्वर्गमें जाते हैं। राजन् ! तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, उसके अनुसार पापाङ्कशाका माहात्म्य मैंने वर्णन किया; 

पापांकुशा एकादशी व्रत की महिमा संपूर्ण 
                                                                      राधे राधे 




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