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parshuram avatar परशुरामावतार की कथा कैसे परशुराम ने क्षत्रिय राजाओं का संहार किया

  parshuram avatar  परशुरामावतार की कथा कैसे परशुराम ने  क्षत्रिय राजाओं का संहार किया


परशुराम अवतार  भगवान विष्णु ने  ही परशुराम अवतार के रूप में जन्म लिया धरती पर जब  क्षत्रिय राजाओंका अत्याचार बढ़ गया  तब  उन अत्याचारी राजाओं ने गौ, ब्राह्मण और साधुयों को  बहुत कष्ट  दिया  इन कष्टों को दूर करने के लिए श्री हरी ने परशुराम अवतार धारण किया  परशुराम  की कथा सभी पापों  को हर ने वाली है इसलिए इस कथा का पाठ करना चाहिए 

                   ॐ गणपतये नमः ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः                                                     

                                  परशुराम अवतार                                       

 प्राचीन कालकी बात है-पृथ्वीपर हैहयवंशीय क्षत्रिय राजाओंका अत्याचार बढ़ गया था। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। गौ, ब्राह्मण और साधु असुरक्षित हो गये थे। ऐसे समयमें भगवान् स्वयं परशुरामके रूपमें जमदग्नि ऋषिकी पत्नी रेणुकाके गर्भसे अवतरित हुए।
उन दिनों हैहयवंशका राजा सहस्त्रबाहु र्जुन था। वह बहुत ही अत्याचारी और क्रूर शासक था। एक बार वह जमदग्नि ऋषिके आश्रमपर आया। उसने आश्रमके पेड़-पौधोंको उजाड़ दिया। जाते समय ऋषिकी गाय भी लेकर चला गया। जब परशुरामजीको उसकी दुष्टताका समाचार मिला तब उन्होंने सहस्त्रबाहु अर्जुनको मार डाला। सहस्रबाहुके मर जानेपर उसके दस हजार लड़के डरकर भाग गये।
सहस्रबाहु अर्जुनके जो लड़के परशुरामजीसे हारकर भाग गये थे, उन्हें अपने पिताके वधकी याद निरन्तर बनी रहती थी। कहीं एक क्षणके लिये भी उन्हें चैन नहीं मिलता था। एक दिनकी बात है, परशुरामजी अपने भाइयोंके साथ आश्रमके बाहर गये हुए थे। अनुकूल अवसर पाकर सहस्रबाहुके लड़के वहाँ आ पहुँचे। उस समय महर्षि जमदग्निको अकेला पाकर उन पापियोंने उन्हें मार डाला। सती रेणुका सिर पीट-पीटकर जोर-जोरसे रोने लगीं। - परशुरामजीने दूरसे ही माताका करुण-क्रन्दन सुन लिया। वे बड़ी शीघ्रतासे आश्रमपर आये। वहाँ आकर देखा कि पिताजी मार डाले गये हैं। उस समय परशुरामजीको बहुत दुःख हुआ। वे क्रोध और शोकके वेगसे अत्यन्त मोहित हो गये। उन्होंने पिताका शरीर तो भाइयोंको सौंप दिया और स्वयं हाथमें फरसा उठाकर क्षत्रियोंका संहार कर डालनेका निश्चय किया।
भगवान्ने देखा कि वर्तमान क्षत्रिय अत्याचारी हो गये हैं। इसलिये उन्होंने अपने पिताके वधको निमित्त बनाकर इक्कीस बार पृथ्वीको क्षत्रियहीन कर दिया। भगवान्ने इस प्रकार भृगुकुलमें अवतार ग्रहण करके पृथ्वीका भार बने राजाओंका बहुत बार वध किया। तत्यश्चात् भगवान् परशुरामने अपने पिताको जीवित कर दिया। जीवित होकर वे सप्तर्षियोंके मण्डलमें सातवें ऋषि हो गये। अन्तमें भगवान् यज्ञमें सारी पृथ्वी दान कर महेन्द्र पर्वतपर चले गये।
महेन्द्र पर्वतपर विराजमान भगवान् परशुरामजीको हम सब नमस्कार करते हैं


   परशुराम अवतार की कथा संपूर्ण  


                                                                                     राधे राधे 

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