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varaha avatar वाराह-अवतार की कथा संपूर्ण मनोवांछित फल देने वाली है

वराह अवतार विष्णु जी  का अवतार है  जब  दैत्यों ने  पृथ्वी  माता को  सागर  में  डूबा  दिया था  तभी सृष्टि  के पालन  करता  विष्णु जी ने पृथ्वीका उद्धार  करने  के लिए  वराह  अवतार  धारण किया जो भक्त वराह अवतार के चरित को पढ़ता एवं  सुनता है उसे मनोवाञ्छित  फल मिलता उसका हरी के चरणों में प्रेम बढ़ता है        

                           varaha avatar  वाराह-अवतार की कथा संपूर्ण मनोवांछित फल देने वाली है

                           ॐ गणपतये नमः ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नमः 

                                  वाराह-अवतार 

विष्णु भगवान ने  प्रलय के  जलमें डूबी हुई पृथ्वीका उद्धार करनेके लिये वराह-शरीर धारण किया। कहा जाता है कि एक दिन स्वायम्भुव मनुने बड़ी नम्रतासे हाथ जोड़कर अपने पिता ब्रह्माजीसे कहा-'पिताजी! एकमात्र आप ही समस्त जीवोंके जन्मदाता हैं। आप ही जीविका प्रदान करनेवाले भी हैं। हम आपको नमस्कार करते हैं। हम ऐसा कौनसा कर्म करें, जिससे आपकी सेवा बन सके? हमें सेवा करनेकी आज्ञा दीजिये।' मनुकी बात सुनकर ब्रह्माजीने कहा-'पुत्र! तुम्हारा कल्याण हो। मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ। क्योंकि तुमने मुझसे आज्ञा माँगी है और आत्मसमर्पण किया है। पुत्रोंको अपने पिताकी इसी रूपमें पूजा करनी चाहिये। उन्हें अपने पिताकी आज्ञाका आदरपूर्वक पालन करना चाहिये। तुम धर्मपूर्वक पृथ्वीका पालन करो। यज्ञोंद्वारा श्रीहरिकी आराधना करो। प्रजापालनसे मेरी बड़ी सेवा होगी।' इसपर मनुने कहा-'पूज्यपाद! मैं आपकी आज्ञाका पालन अवश्य करूँगा। किन्तु सब जीवोंका निवास स्थान पृथ्वी इस समय प्रलयके जलमें डूबी हुई है। मैं पृथ्वीका पालन कैसे करूँ?'
पृथ्वीका हाल सुनकर ब्रह्माजी बहुत चिन्तित हुए। वह पृथ्वीके उद्धारकी बात सोच ही रहे थे कि उनकी नाक से अचानक अँगूठेके आकारका एक वराह-शिशु निकला। देखते-ही-देखते वह पर्वताकार होकर गरजने लगा। ब्रह्माजीको भगवान की  माया समझते देर न लगी। भगवान की घरघराहट सुनकर वे उनकी स्तुति करने लगे।
ब्रह्माजीकी स्तुतिसे वराहभगवान् प्रसन्न हुए। वे जगत्-कल्याणके लिये जलमें घुस गये। थोड़ी देर बाद वे जलमें डूबी हुई पृथ्वीको अपनी दाढ़ोंपर लेकर रसातलसे ऊपर आये। उनके मार्गमें विघ्न डालनेके लिये महापराक्रमी हिरण्याक्षने जलके भीतर ही उनपर गदासे आक्रमण किया। इससे उनका क्रोध चक्रके समान तीक्ष्ण हो गया। उन्होंने उसे लीलासे ही इस प्रकार मार डाला, जैसे सिंह हाथीको मार डालता है।।
जलसे बाहर निकले हुए भगवानको देखकर ब्रह्मा आदि देवता हाथ जोड़कर उनकी स्तुति करने लगे। इससे प्रसन्न होकर वराहभगवान्ने अपने खरोंसे जलको रोककर उसपर पृथ्वीको स्थापित कर दिया।
पथ्वीका उद्धार करनेवाले वराहभगवान को  सब नमस्कार करते हैं।

वराह अवतार कथा संपूर्ण 

                                                                                      राधे  राधे 


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