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पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा अपार एवं अनंत है : Glory of Purushottam region

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा अपार एवं अनंत है : Glory of Purushottam region

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा अपार एवं अनंत है : Glory of Purushottam region
पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा अपार एवं अनंत है : Glory of Purushottam region

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा

पुरुषोत्तम क्षेत्र को अति पवित्र पुण्यप्रद बताया गया है।  इसे  जगन्नाथ धाम भी कहा गया है पुराणों के अनुसार इस तीर्थ के क्षेत्र का विस्तार उड़ीसा में दक्षिण कटक, पुरी तथा वेंकटाचल तक है। पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा अनंत है  पुरुषोत्तम क्षेत्र में शङ्ख, चक्र, गदा, पद्म और पीताम्बर धारण करने वाले कमलनयन भगवान् श्रीकृष्ण विराजमान हैं, जिन्होंने कंस और केशीका संहार किया था। जो लोग वहाँ देव-दानव-वन्दित श्रीकृष्ण, बलभद्र और सुभद्राका दर्शन करते हैं, वे धन्य हैं। भगवान् श्रीकृष्ण तीनों लोकों के स्वामी तथा सम्पूर्ण अभीष्ट वस्तुओं के दाता हैं। जो सदा उनका ध्यान करते हैं, वे निश्चय ही मुक्त हो जाते हैं।

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा 
जो सदा श्रीकृष्ण में मन लगायें  रहते हैं, रात को सोते समय श्रीकृष्णका चिन्तन करते हैं और फिर सोकर उठने के बाद श्रीकृष्णका स्मरण करते हैं, वे शरीर त्यागने के बाद श्रीकृष्ण में ही प्रवेश करते हैं-ठीक वैसे ही जैसे मन्त्रोच्चारण पूर्वक होम किया हुआ हविष्य अग्नि में लीन हो जाता है। अतः मुनिवरो! मोक्षकी इच्छा रखनेवाले पुरुषोंको पुरुषोत्तम क्षेत्र में सदा यत्नपूर्वक कमलनयन श्रीकृष्णका दर्शन करना चाहिये। जो मनीषी पुरुष शयन और जागरणकाल में श्रीकृष्ण, बलभद्र तथा सुभद्राका दर्शन करते हैं, 

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा 
वे श्रीहरि के धाममें जाते हैं। जो हर समय भक्तिपूर्वक पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण, रोहिणीनन्दन बलभद्र और सुभद्रादेवीका दर्शन करते हैं, वे भगवान् विष्णुके लोकमें जाते हैं। जो वर्षाके चार भगवान् विष्णुके लोकमें जाते हैं। जो वर्षाके चार महीनोंमें पुरुषोत्तमक्षेत्रके भीतर निवास करते हैं, उन्हें सारी पृथ्वीको तीर्थयात्रासे भी अधिक फल प्राप्त होता है। जो इन्द्रियोंको जीतकर और क्रोधको वशीभूत करके सदा पुरुषोत्तमक्षेत्रमें ही निवास करते हैं, वे तपस्याका फल पाते हैं। मनुष्य अन्य तीर्थों में दस हजार वर्षांतक तपस्या करके जो फल पाता है,

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा 
उसे पुरुषोत्तमक्षेत्रमें एक ही मासमें प्राप्त कर लेता है। तपस्या, ब्रह्मचर्यपालन तथा आसक्तित्यागसे जो फल मिलता है, उसे मनीषी पुरुष वहाँ सदा ही पाते रहते हैं। सब तीर्थोंमें स्नानदान करनेका जो पुण्य फल बताया गया है, वह मनीषी पुरुषोंको यहाँ सर्वदा प्राप्त होता है। विधिपूर्वक तीर्थसेवन तथा व्रत और नियमोंके पालनसे जो फल बताया गया है, उसे वहाँ इन्द्रियसंयमपूर्वक पवित्रतासे रहनेवाला पुरुष प्रतिदिन प्राप्त करता है। नाना प्रकारके यज्ञोंसे मनुष्य जो फल प्राप्त करता है, वह जितेन्द्रिय पुरुषको वहाँ प्रतिदिन मिला करता है।

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा 
जो पुरुषोत्तमक्षेत्रमें कल्पवृक्ष (अक्षयवट)-के पास जाकर शरीरत्याग करते हैं, वे निःसंदेह मुक्त हो जाते हैं। जो मानव बिना इच्छाके भी वहाँ प्राणत्याग करता है, वह भी दुःखसे मुक्त हो दुर्लभ मोक्ष प्राप्त कर लेता है। कृमि, कीट, पतङ्ग आदि तथा पशु-पक्षियोंकी योनिमें पड़े हुए जीव भी वहाँ देहत्याग करनेपर परमगतिको प्रास करते हैं। जो मनुष्य एक बार भी श्रद्धापूर्वक भगवान् पुरुषोत्तमका दर्शन कर लेता है, वह सहस्रों पुरुषोंमें उत्तम है। भगवान् प्रकृति से परे और पुरुषसे भी उत्तम हैं।

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा 
इसलिये | वे वेद, पुराण तथा इस लोकमें पुरुषोत्तम कहलाते हैं। जो पुराण और वेदान्तमें परमात्मा कहे गये हैं वे ही सम्पूर्ण जगत्का उपकार करनेके लिये उस क्षेत्रमें पुरुषोत्तमरूपसे विराजमान हैं। पुरुषोत्तमक्षेत्रके  भीतर मार्गमें, श्मशानभूमिमें, घरके मण्डपमें,सड़कों और गलियोंमें-जहाँ कहीं इच्छा या अनिच्छासे भी शरीस्त्याग करनेवाला मनुष्य मोक्षका भागी होता है। पुरुषोत्तमतीर्थ के समान किसी तीर्थका माहात्म्य न हुआ है और न होगा। मैंने उस क्षेत्रके गुणोंका एक अंशमात्र यहाँ बताया है। कौन पुरुष सौ वर्षों में भी उसके समस्त गुणोंका वर्णन कर सकता है। मुनिवरो! यदि तुम सनातन मोक्ष पाना चाहते हो तो पुरुषोत्तम क्षेत्र  में निवास करो

पुरुषोत्तम क्षेत्र की महिमा संपूर्ण                                                 राधे राधे 

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