नरक में पापी व्यक्तियों की दुर्दशा पद्म पुराण की Real story:Hell real story in hindi padma purana


Hell real story in hindi padma purana
                         नरक में पापी व्यक्तियों की दुर्दशा पद्म पुराण की Real story
                        Hell real story in Hindi Padma Purana                     



 श्री राधे  
मैं आज आप को  spiritual में  पद्म पुराण की रियल स्टोरी को सुनने गे जो नरक ( यमपुरी ) के बारे में है वहां पापी व्यक्तियों को कैसे दंडित किया जाता है उनके पाप कर्मों का भयंकर दंड उन्हें कैसे  मिलता हैं इस कहानी के माध्यम से आप सभी जाने गे इसे पढ़ने के बाद आप भी पाप कर्मों से डरेंगे और आपका मन भी भगवान के चरणों में लगने लगेगा तो पढ़े इस रियल स्टोरी को 
कहानी कुछ बड़ी होने वाली है इसलिए ध्यान से पढ़िएगा 


वसिष्ठ जी कहते है-राजन् (दिलीप ) से भोजपुर में एक उचथ्य नामक श्रेष्ठ मुनी रहते थे उनकी एक कन्या थी जिसका नाम सुवृत्ता था वह माघ मास में प्रतिदिन सवेरे से अपनी सखियों के साथ कावेरी नदी में स्नान किया करती थी इस प्रकार सुवृत्ता ने 3 वर्षों तक माघ स्नान किया
एक दिन सुवृत्ता अपने तीन साथियों के साथ माघ स्नान के लिए सुबह के समय कावरी के तट पर आई उसी समय एक भयंकर हाथी पानी से निकला उस हाथी को देख सुवृत्ता और उनकी सखिया भागी हाथी भी बहुत दूर तक उनके पीछे पीछे भागा चारों कन्याएं (लड़कियां ) तेज  दौड़ के कारण एक तिनकों  को से ढके हुए सूखे कुएं में जा गिरी और उनकी मृत्यु हो गई 

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जब वे सभी  घर लौटकर नहीं आई तो उनके माता-पिता उनकी खोज करते हुये इधर-उधर भटकने लगे आगे जाने पर उन्हें एक गहरा कुआं दिखाई दिया उन्होंने उस में देखा तो वे चारों कन्याएं (लड़कियां ) उसके भीतर मृत पड़ी थी  उनकी माताएं कन्याओं को गले से लगा कर रोने लगी कन्याओं की माताओं को ऐसे रोते की आवाज सुनकर उसी समय मृगशृङ्ग मुनि वहाँ आ पहुँचे। 

मृगशृङ्ग  मुनि ने मन ही मन उपाय सोच कर उन्हें विश्वाश देते हुए कहा जब तक इन कन्याओं को जीवित नहीं कर दूंगा तब तक आप इनके मृत शरीर की रक्षा करें ऐसा कहकर मुनि कावेरी नदी के तट पर गये और गले तक पानी में खड़े हो गए और यमराज मृत्यु के देवता की प्रार्थना (स्तुति) करने लगे उनकी प्रार्थना से प्रसन्न होकर यमराज प्रकट हुए यमराज ने कहा मुनि मैं तुम्हारी प्रार्थना से बहुत प्रसन्न हूं इसलिए तुम मुझसे मनोवांछित वर मांगो तब उन मुनि ने कहा प्रभु इन कन्याओं को प्राण दान दे दीजिए मैं आपसे यही मांगता हूं 

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मुनि की बात सुनकर उन मृत पड़ी कन्याओं को पुनः जीवित कर दिया कन्याओं को जीवित देखकर उनकी माताएं बहुत खुश हुई फिर उन कन्याओं ने मरने के बाद की बातें अपनी माताओं को बताएं कन्याओं ने कहा कन्याओं ने कहा-माताओ ! यमलोक बड़ा ही घोर और भय उत्पन्न करने वाला है। वहाँ सर्वदा चारों प्रकार के जीवोंको विवश होकर जाना पड़ता है। गर्भ में रहने वाले अथवा जन्म लेने वाले शिशु, बालक, तरुण, अधेड़, बूढ़े, स्त्री, पुरुष और नपुंसक-सभी तरह के जीवों को वहाँ जाना होता है। 

वहाँ चित्रगुप्त आदि समदशी एवं मध्यस्थ सत्पुरुष मिलकर देहधारियों के शुभ और अशुभ फलका विचार करते हैं। माताओ तथा बन्धुजन ! अब हम वहकि पापी जीवोंके कष्टका वर्णन करती हैं, आप सब लोग धैर्य धारण करके सुनें। जो क्रूरतापूर्ण कर्म करने वाले और दान न देनेवाले पापी जीव है, वे वहाँ यमराजके घरमें अत्यन्त भयंकर दक्षिणमार्गसे जाते हैं। यमराज का नगर अनेक रूपों में स्थित है, उसका विस्तार चारों ओर से छियासी हजार योजन समझना चाहिये। पुण्यकर्म करनेवाले पुरुषोंको वह बहुत निकट-सा जान पड़ता है,किन्तु भयंकर मार्गसे जानेवाले पापी जीवों के लिये वह अत्यन्त दूर है। 

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वह मार्ग कहीं तो तीखे काँटों से भरा होता है और कहीं रेत एवं कंकड़ों से । कहीं पत्थरो के ऐसे टुकड़े बिछे होते हैं, जिनका किनारा छुरोंकी धारके समान तीखा होता है। कहीं बहुत दूरतक कीचड़-ही-कीचड़ भरी रहती है। और कहीं-कहीं लोहे की सुई के समान नुकीले कुशो से सारा मार्ग ढका होता है। इतना ही नहीं, कहीं-कहीं बीच रास्ते में वृक्षोसे भरे हुए पर्वत होते हैं, जो किनारेपर भारी जल-प्रपात के कारण अत्यन्त दुर्गम जान पड़ते हैं। कहीं रास्तेपर दहकते हुए अंगारे बिछे रहते हैं। 

ऐसे मार्ग से पापी जीवों को दुःखित होकर जाना पड़ता है। कहीं ऊँचे-नीचे गड्ढे, कहीं फिसला देनेवाले चिकने देले, कहीं खूब तपी हुई बालू और कहीं तीखी कीलों से वह मार्ग व्याप्त रहता है। कहीं-कहीं अनेक शाखाओं में फैले हुए सैकड़ों वन और दुःखदायी अन्धकार हैं, जहाँ कोई सहारा देनेवाला भी नहीं रहता। कहीं तपे हुए लोहे के कांटेदार वृक्ष, कहीं दावानल, कहीं तपी हुई शिला और कहीं हिम से वह मार्ग  ढका हुआ  रहता है। कहीं ऐसी बालू भरी रहती है, 

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जिसमें चलनेवाला जीव कण्ठतक धस  जाता है और बालू कानके पासतक आ जाती है। कहीं गरम जल और कहीं कंडोंकी आगसे यमलोकका मार्ग व्याप्त रहता है। कहीं धूल मिली हई प्रचण्ड वायुका बवंडर उठता है और कहीं बड़े-बड़े पत्थरोंकी वर्षा होती है। उन सबकी पीड़ा सहते हए पापी जीव यमलोकमें जाते हैं। रेतकी भारी वर्षा से सारा शरीर भर जाने के कारण पापी जीव रोते है। 

महान् मेघों की भयङ्कर गर्जना से वे बारम्बार थर्रा उठते हैं। कहीं तीखे अस्त्र शस्त्रों की वर्षा होती है, जिससे उनके सारे शरीर में घाव हो जाते हैं। तत्पश्चात् उनके ऊपर नमक मिले हुए पानीकी मोटी धाराएँ बरसायी जाती है। इस प्रकार कष्ट सहन करते हुए उन्हें जाना पड़ता है। कहीं अत्यन्त ठंडी, कहीं रूखी और कहीं कठोर वायुका सब ओर से आघात सहते हुए पापी जीव सूखते और रोते हैं। 

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इस प्रकार वह मार्ग बड़ा ही भयङ्कर है। वहाँ कोई सहारा देनेवाला नहीं रहता। वह सब ओरसे दुर्गम और निर्जन है। वहाँ और कोई मार्ग आकर नहीं मिला है। वह बहुत बड़ा और आश्रयरहित है। वहाँ अन्धकार-ही-अन्धकार भरा रहता है। वह महान् कष्टप्रद और सब प्रकार के दुःखो का आश्रय है। ऐसे ही मार्ग से यमकी आज्ञाका पालन करने वाले अत्यन्त भयङ्कर यमदूतों द्वारा समस्त पाप-परायण मूढ़ जीव बलपूर्वक लाये जाते हैं। 
वे अकेले , पराधीन तथा मित्र और बन्धु बान्धवों से रहित होते हैं। अपने कर्मोंके लिये बारम्बार शोक करते और रोते हैं। उनका आकार प्रेत-जैसा होता है। उनके शरीरपर वस्त्र नहीं रहता। कण्ठ, ओठ और तालू सूखे होते हैं। वे शरीरसे दुर्बल और भयभीत होते हैं तथा क्षुधा ( भूख ) की आगसे जलते रहते हैं। यमदूत किन्हीं-किन्हीं पापी मनुष्यों को सुलाकर उनके पैरों में जंजीर बाँध देते हैं और उन्हें घसीटते हुए खींचते हैं।

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कितने ही दूसरे जीव ललाटमें अंकुश चुभाये जानेके कारण कष्ट भोगते हैं। कितनों की बाँह पीठ की ओर घुमाकर बाँध दी जाती और उनके हाथों में कील ठोक दी जाती है। साथ ही पैरों में बेड़ी भी पड़ी होती है। इस दशा में भूखका कष्ट सहन करते हुए उन्हें जाना पड़ता है। कुछ दूसरे जीवों के गले में रस्सी बाँधकर उन्हें पशुओं की भाँति घसीटा जाता है और वे अत्यन्त दुःख उठाते रहते हैं। कितने ही दुष्ट मनुष्योंकी जिह्वा में रस्सी बाँधकर उन्हें खींचा जाता है। 

किन्हीं की कमरमें भी रस्सी बाँधी जाती  यमदूत किन्हीं की नाक बाँधकर खींचते हैं और किन्हीं के गाल तथा ओठ छेदकर उनमें रस्सी डाल देते और उन्हें खींचकर ले जाते हैं।  कुछ लोगोंके कानों और ठोढ़ियोंमें छेद करके उनमें रस्सी डालकर खींचा जाता है। किन्हींक पैरों और हाथोंके अग्रभाग काट लिये जाते हैं। किन्हींक कण्ठ, ओठ और तालुओं में छेद कर दिया जाता है। 

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किन्हीं-किन्हीं  के अण्डकोश कट जाते हैं और कुछ लोगोंके समस्त अंगो की सन्धियाँ काट दी जाती हैं। किन्हीं को भालो से छेदा जाता है, कुछ बाणोंसे घायल किये जाते हैं और कुछ लोगोंको मुद्रों तथा लोहेके इंडोसे बारम्बार पीटा जाता है और वे निराश्रय होकर चीखते-चिल्लाते हुए इधर-उधर भागा करते हैं। जलती अग्नि के समान कान्तिवाले भाँति-भांतिके भयङ्कर आरों उन्हें कटा दिया  जाता है और वे पापी जीव पीब तथा रक्त बहाते हुए घाव से पीड़ित होते और कीड़ों से डसे जाते हैं। 

इस प्रकार उन्हें विवश करके यमलोक में ले जाया जाता है। वे भूखप्याससे पीड़ित होकर अन्न और जल माँगते हैं, धूपसे बचनेको छायाके लिये प्रार्थना करते हैं और शीत से व्यथित होकर तापने के लिये अग्नि मांगते हैं। जिन्होंने उक्त वस्तुओका दान नहीं किया होता, वे उस पथपर इसी प्रकार कष्ट सहते हए यात्रा करते हैं। इस प्रकार अत्यन्त दुःखमय मार्गसे चलकर जब वे प्रेतलोकमें पहुंचते हैं, 

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तब दूत उन्हें यमराजके आगे उपस्थित करते हैं। उस समय वे पापी जीव यमराजको भयानक रूपमें देखते हैं। वहाँ असंख्यों भयानक यमदूत, जो काजलके समान काले, महान् वीर और अत्यन्त क्रूर होते है, हाथोंमें सब प्रकारके अस्त्र-शस्त्र लिये मौजूद रहते है। ऐसे ही परिवारके साथ बैठे हुए यमराज तथा चित्रगुप्तको पापी जीव अत्यन्त भयङ्कर रूपमें देखते हैं 

उस समय भगवान् यमराज और चित्रगुप्त उन पापियों को धर्मयुक्त बातो से समझाते हुए बड़े जोर-जोर से फटकारते हैं। वे कहते है-ओ खोटे कर्म करनेवाले पापियो ! तुमने दूसरोंके धन हड़प लिये है

और सुन्दर रूप के घमंड में आकर परायी स्त्रियों के साथ व्यभिचार (दुष्कर्म ) किया है। मनुष्य अपने-आप जो कुछ कर्म करता है, उसे स्वयं ही भोगता है; फिर तुमने अपने ही भोगने के लिये पापकर्म क्यों किया? और अब अपने कर्मोकी आगमें जलकर इस समय तुमलोग संतप्त क्यों हो रहे हो? भोगो अपने उन कर्मोको। 

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इसमें दूसरे किसीका दोष नहीं है। ये राजा लोग भी अपने भयंकर कर्मोसे प्रेरित हो मेरे पास आये हैं। इन्हें अपनी खोटी बुद्धि और बलका बड़ा घमंड था। अरे, ओ दुराचारी राजाओ। तुमलोग प्रजाका सर्वनाश करनेवाले हो। अरे, थोड़े समयतक रहनेवाले राज्यके लिये तुमने पाप क्यों किया? राज्य के लोभमें पड़कर मोहवश बलपूर्वक अन्याय से जो तुमने प्रजाजनों को दण्ड दिया है, इस समय उसका फल भोगो। कहाँ है वह राज्य और कहाँ गयी वह रानी, जिसके लिये तुमने पापकर्म किया था? 

अब तो सबको छोड़कर तुम अकेले ही यहाँ खड़े हो। यहाँ वह बल नहीं दिखायी देता, जिससे तुमने प्रजाओका विध्वंस किया। इस समय यमदूतों की मार पड़नेपर कैसा लग रहा है?' इस तरह नाना प्रकारके वचनों द्वारा यमराज के उलाहना देनेपर वे राजा अपने-अपने कर्मोको सोचते हुए चुपचाप खड़े रह जाते है। इस प्रकार राजाओ से धर्मकी बात कहकर धर्मराज उनके पापपङ्ककी शुद्धिके लिये अपने दूतोंसे इस प्रकार कहते हैं-'ओ चण्ड! ओ महाचण्ड !! तुम इन राजाओंको पकड़कर ले जाओ और क्रमशः नरककी आगमें डालकर इन्हें पापोंसे शुद्ध करो।' 

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तब वे दूत शीघ्र ही उठकर राजाओंके पैर पकड़ लेते हैं और उन्हें बड़े वेगसे आकाशमें घुमाकर ऊपर फेंकते हैं। तत्पश्चात् उन्हें पूरा बल लगाकर तपायी हुई शिलापर बड़े वेगसे पटकते हैं, मानो किसी महान् वृक्षपर वजसे प्रहार करते हो। शिलापर गिरनेसे उनका शरीर चूर-चूर हो जाता है, रक्तके स्रोत बहने लगते हैं और जीव अचेत एवं निश्चेष्ट हो जाता है। 

तदनन्तर वायुका स्पर्श होनेपर वह रौरवसे लेकर अवीचितक कुल एक सौ चालीस नरक माने गये हैं। इन सबमें पापी मनुष्य अपने-अपने कोंक अनुसार डाले जाते हैं और जबतक भाँतिभौतिकी यातनाद्वारा उनके कर्मोका भोग समाप्त नहीं हो जाता, तबतक वे उसीमें पड़े रहते हैं। जैसे सुवर्ण आदि धात् जबतक उनकी मैल न जल जाय तयतक आगमें तपाये जाते हैं, उसी प्रकार पापी पुरुष पापक्षय होनेतक नरकोंकी आगमें शुद्ध किये जाते हैं। 

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इस प्रकार क्लेश सहकर जब ये प्रायः शुद्ध हो जाते हैं, तब शेष कोंक अनुसार पुनः इस पृथ्वीपर आकर जन्म ग्रहण करते हैं। तृण और झाड़ी आदिके भेदसे नाना प्रकारके स्थावर होकर वहाँकै दुःख भोगनेके पश्चात् पापी जीव कीड़ोकी योनिमें जन्म लेते हैं। फिर कोटयोनिसे निकलकर क्रमशः पक्षी होते हैं। पक्षीरूपसे कष्ट भोगकर मृगयोनिमें उत्पन्न होते हैं। वहाँक दुःख भोगकर अन्य पशुयोनिमें जन्म लेते हैं। फिर क्रमशः गोयोनिमें आकर मरनेके पश्चात् मनुष्य होते हैं।

वे कन्यायें माताओ से कहती है हमने यमलोक में इतना ही देखा है। वहाँ पापीको बड़ी भयानक यातनाएँ होती हैं। वहाँ ऐसे-ऐसे नरक है, जो न कभी देखे गये थे और न कभी सुने ही गये थे। वह सब मनुष्य लोग न तो जान सकते  हैं और न देख ही सकते है। इसलिए हम सभी को इन भयंकर नरको से बचने के लिए हर समय विष्णु भगवान के नामों का चिंतन करना चाहिए एक मात्र वही है जो हमें इन नरको से बचा सकते है 

कैसी लगी आप ये कहानी कमेंट करके जरूर बताये


नरक में पापी व्यक्तियों की दुर्दशा पद्म पुराण की Real story:Hell real story in hindi padma purana नरक में पापी व्यक्तियों की दुर्दशा पद्म पुराण की Real story:Hell real story in hindi padma purana Reviewed by Sweet stories on November 14, 2019 Rating: 5

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