श्रीमद भगवद गीता एक किताब नहीं स्वयं भगवान है : God himself has said this true words


Shrimad bhagavad gita true words
Shrimad bhagavad gita true words


श्रीमद भगवद गीता का ज्ञान अद्भुत है उसको पढ़ने वाला व्यक्ति इस जीवन को समझ सकता है और जान सकता है वास्तव में विजय उसी की होती है भागवत गीता में जीवन की हर एक परेशानियों का हल है चाहे वह भौतिक हो या आध्यात्मिक जैसी गुरु के पास जाने से शिष्य  को जान प्राप्त हो जाता है वैसे ही भागवत गीता को पढ़ने से हमारी सारी परेशानियां हल हमें मिल जाता है और हो क्यों ना क्योकि भागवत गीता स्वयं भगवान कृष्ण का रूप है

एक बार माता लक्ष्मी ने श्री विष्णु भगवान से पूछा प्रभु मेरे मन में शंका है विष्णु भगवान ने कहा किस बात की शंका लक्ष्मीदेवी ने कहा  'भगवन् ! यदि आपका स्वरूप स्वयं परमानन्दमय और मन-वाणीकी पहुँचके बाहर है तो गीता कैसे उसका बोध कराती है?  मेरे इस सन्देह का आप निवारण कीजिये।

विष्णु भगवान ने कहा-देवी ! सुनो, मैं गीता में अपनी स्थिति का वर्णन करता हूँ। क्रमशः पाँच अध्यायों को तुम पाँच मुख जानो, दस अध्यायों को दस भुजाएँ समझो तथा एक अध्याय को उदर और दो अध्यायों को दोनों चरण कमल जानो। इस प्रकार यह अठारह अध्यायों की मेरी वाङ्मयी ईश्वरीय मूर्ति ही समझनी चाहिए।
इसलिए अध्ययन करते हुए ऐसा भाव बनायें कि गीता केवल पुस्तक ही नहीं है, वरन् भगवान् श्रीकृष्ण की वाङ्मयी मूर्ति है। 

भगवद्-वाणी के रूप में साक्षात भगवान् ही हमारे पास हैं। इसलिये इस पुस्तक का पाठ सिर्फ पाठ ही नहीं, वरन् भगवान्  ही  है। ऐसा भाव बनाकर श्रद्धा व विश्वास के साथ अध्ययन करें, तब अन्त:करण की शुद्धता और विचारों में पवित्ता अपने आप होने लगेगी। अगर सच्चे  जिज्ञासु की तरह इस पुस्तक का हम स्वाध्याय, मनन एवं चिन्तन करते है तो इस जीवन में उलछा व्यक्ति भी शांति को प्राप्त कर सकता है 

 जो व्यक्ति गीता-ज्ञान के अनुसार अपने जीवन को चलाते हैं, वे भगवान  की कृपा से सहज ही संसार-सागर को पार कर लेते हैं। अज्ञान अन्धकार से निकलकर, आत्मज्ञान से प्रकाशित हो कर हो ईश्वर के रूप में समा जाते हैं। ऐसे लोग  न केवल अपने जीवन को सफल बनाते हैं वरन् न जाने कितने और लोगों  के जीवन को भी सफल बनाते हैं। जिस प्रकार हजारोंलाखों बुझे हुए दीपक कभी एक दीपक को भी प्रकाशित नहीं कर सकते, परन्तु एक जलता हुआ दीपक लाखों-करोड़ों बुझे हुये दीपों की ज्योति को प्रकाशित कर सकता है; 

उसी प्रकार एक सांसारिक व्यक्ति कभी दूसरे किसी सांसारिक व्यक्ति को ज्ञान ज्योति से प्रकाशित नहीं कर सकता, परन्तु एक ऐसा मनुष्य ‘गीता-ज्ञान' जिसने अपने जीवन में उतार लिया है, वह अनेक भक्तों के हृदय में ज्ञान ज्योति जगाने का माध्यम बन सकता है।
श्रीमद भगवद गीता को अपने जीवन में अपना कर न जाने कितने लोगो ने खुशीओ में बदला है इसलिए हमें भी श्रीमद भगवद गीता को पढ़ना चाहिए जीवन की उलझनों से निकल ने का एक मात्र उपाय यही है 

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श्रीमद भगवद गीता एक किताब नहीं स्वयं भगवान है : God himself has said this true words श्रीमद भगवद गीता एक किताब नहीं स्वयं भगवान है : God himself has said this true words Reviewed by Sweet stories on November 14, 2019 Rating: 5

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