त्रिलोक सुन्दरी:बेताल और राजा विक्रमादित्य की कहानी moral story in hindi language

               
betaal aur raja vikramaditya ki kahan moral story in hindi language



वैताल राज से बोला अब मैं एक दूसरी कथा सुनाता हूँ। चम्पापुरी (भागलपुर) नामकी एक प्रसिद्ध नगरी थी, वहाँ चम्पकेश नामका एक बलवान् और धनुर्धारी राजा रहता था। उसकी रानीका नाम था सुलोचना । उसके त्रिलोकसुन्दरी नामकी एक लड़की थी


वह बहुत ही सुंदर थी  ।  उससे देवता भी विवाह करना चाहते थे, अन्य मनुष्यों की तो बात ही क्या ? उसके स्वयंवर में सभी राजा तथा  इन्द्र,वरुण, कुबेर, धर्मराज और यम आदि देवता भी मनुष्यका शरीर धारण करके आये। उनमे से इन्द्रदत्त ने लड़की  के पिता राजा चम्पक से कहा-राजा !

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 मैं सभी शास्त्रों में कुशल हूँ, रूपवान् एवं मनोरम हूँ, अतः आप अपनी पुत्री की मुझसे शादी कर दें। दूसरे धर्मदत्त ने कहा-'राजन्! मैं धनुर्विद्यामें कुशल एवं मनोरम है, आप अपनी पुत्री की  मुझसे शादी कर दें। तीसरे ने कहा-'राजन् ! मेरा नाम धनपाल है, मैं सभी प्राणियोंकी भाषा जानता है, मैं गुणवान् और रूपवान् भी हूँ 

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आप अपनी पुत्री की मुझसे शादी कर दें चौथे ने कहा-'राजन् ! मैं सर्वकला-विशारद हूँ, प्रतिदिन अपने उद्योग से पांच रत्न प्राप्त करता है, उनमे से पुण्य के लिये एक रत्न, होम के लिये द्वितीय रत्न , आत्मा के लिये तृतीय रत्न, पत्नी के लिये चतुर्थ रत्न तथा शेष अन्तिम रत्न भोजन के लिये खर्च करता हूँ।

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अतः आप अपनी कन्या मुझ सर्वकला विशारद को प्रदान करें। यह सुनकर राजा आचर्य में पड़ गया कि अपनी पुत्री में किसे दू। वह कुछ निर्णय  नहीं कर पाया। अन्त में उसने सारी बातें पुत्री को बतायीं और उससे पूछा कि तुम्हें इनमे से कौन-सा वर तुम्हारे लिए अच्छा है, पर कन्या त्रिलोकसुन्दरी ने लजावश कुछ भी उत्तर नहीं दिया।

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वैताल ने पूछा-राजा  अब आप बतायें कि उस कन्या के योग्य वर इनमे से कौन था? राजा बोला वह कन्या त्रिलोकसुन्दरी धर्मदत के योग्य है; क्योंकि इन्द्रदत्त वेदादि शास्त्रो का शाता है, अतः वर्ण से वह ब्राह्मण कहा जायगा। भाषा जाननेवाला तथा धन-धान्य का विस्तार करनेवाला धनपाल वणिक ( व्यापार करने वाला )  कहा जायगा। 

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तृतीय जो कला का ज्ञाता है और रत्नों का व्यापार करता है,वह शूद्र कहलायेगा। वैताल ! सवर्णक (अपनी ही जाति ) लिये ही कन्या योग्य होती है, अतः धनुर्वेद-शास्त्र में जो निपुण धर्मदत्त है, वह वर्ण से क्षत्रिय कहलायेगा, इसलिये उस क्षत्रिय कन्याका विवाह धर्मदत्तके साथ ही किया जाना चाहिये।
वेताल ले कहा राजा तुम ने बिलकुल ठीक उत्तर दिया 





त्रिलोक सुन्दरी:बेताल और राजा विक्रमादित्य की कहानी moral story in hindi language  त्रिलोक सुन्दरी:बेताल और राजा विक्रमादित्य की कहानी moral story in hindi language Reviewed by Sweet stories on November 27, 2019 Rating: 5

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