somnath jyotirlinga story in hindi


somnath jyotirlinga spiritual story in hindi
somnath jyotirlinga spiritual story in hindi



somnath jyotirlinga   story in hindi

श्री सोमनाथ ज्योतिलिंग विश्व प्रसिद्ध धाम है श्री सोमनाथज्योतिलिंग गुजरात प्रान्त के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे स्थित है जो भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण करते है श्री सोमनाथ ज्योतिलिंग को पुराणों में प्रभास क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता था यहीं भगवान् श्रीकृष्ण ने जरा नामक व्याध के बाणको निमित्त बनाकर अपनी लीला का संवरण किया था। श्री सोमनाथ धाम की कहानी  बड़ी ही प्यारी है जिसको सुनने से क्षय रोग का नाश होता  है साथ ही जीव को पापों से मुक्ति मिलती है 

 श्री सोमनाथ की कहानी का वर्णन शिव पुराण में इस प्रकार बताया गया है   प्रजापति दक्ष ने अपनी अश्विनी आदि सत्ताईस कन्याओं का विवाह चन्द्रमा के साथ किया था। चन्द्रमा को स्वामी के रूप में  पाकर वे दक्षकन्याएँ विशेष शोभा पाने लगीं तथा चन्द्रमा भी उन्हें पत्नी के रूपमें पाकर निरन्तर सुशोभित होने लगे। उन सब पत्नियों  में भी जो रोहिणी नाम की  पत्नी थी, एकमात्र वही चन्द्रमा को जितनी प्रिय थी, उतनी दूसरी कोई पत्नी कदापि प्रिय नहीं हुई। इससे दूसरी स्त्रियों को बड़ा दुःख हुआ। वे सब अपने पिताकी शरण में गयीं। वहाँ जाकर उन्होंने जो भी  दुःख  था. उसे पिताको को बताया  यह  सब सुनकर दक्ष भी दुःखी हो गये और चन्द्रमा के पास आकर शान्ति पूर्वक बोले।

somnath jyotirlinga   story in hindi
दक्षने कहा-कलानिधे! तुम निर्मल कुलमें उत्पन्न हुए हो। तुम्हारे आश्रय में रहने वाली जितनी स्त्रियाँ हैं, उन सबके प्रति तुम्हारे मन में  भेद-भाव  क्यों है? तुम किसी को अधिक और किसी को कम प्यार क्यों करते हो? अबतक जो किया, सो किया, अब आगे फिर कभी ऐसा विषमतापूर्ण बर्ताव तुम्हें नहीं करना चाहिये; क्योंकि उसे नरक देनेवाला बताया गया है। अपने दामाद चन्द्रमा से स्वयं ऐसी प्रार्थना करके प्रजापति दक्ष घरको चले गये। 

 उन्हें पूर्ण निश्चय हो गया था कि अब फिर आगे ऐसा नहीं होगा। पर चन्द्रमा ने  उनकी बात नहीं मानी। वे रोहिणी में इतने आसक्त हो गये थे कि दूसरी किसी पत्नीका कभी आदर नहीं करते थे। इस बातको सुनकर दक्ष दुःखी हो फिर स्वयं आकर चन्द्रमा को उत्तम नीति से समझाने तथा न्यायोचित बर्ताव के लिये प्रार्थना करने लगे।
दक्ष बोले-चन्द्रमा! सुनो, मैं पहले अनेक बार तुम से प्रार्थना कर चुका हूँ। फिर भी तुमने मेरी बात नहीं मानी। इसलिये आज शाप देता हूँ कि तुम्हें क्षयका रोग हो जाय।

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सूतजी कहते हैं-दक्ष के इतना कहते ही क्षणभर में चन्द्रमा क्षयरोग से ग्रस्त हो गये। उनके क्षीण होते ही उस समय सब ओर महान् हाहाकार मच गया। सब देवता और ऋषि कहने लगे कि 'हाय! हाय! अब क्या करना चाहिये, चन्द्रमा कैसे ठीक होंगे?' मुने! इस प्रकार दुःखमें पड़कर वे सब लोग विह्वल हो गये। चन्द्रमाने इन्द्र आदि सब देवताओं तथा ऋषियोंको अपनी अवस्था सूचित की। तब इन्द्र आदि देवता तथा वसिष्ठ आदि ऋषि ब्रह्माजीकी शरण में गये। 

 उनकी बात सुनकर ब्रह्माजी ने कहा देवताओ ! जो हुआ, सो हुआ। अब वह निश्चय ही पलट नहीं सकता। अत: उसके निवारण के लिये मैं तुम्हें एक उत्तम उपाय बताता हूँ। आदरपूर्वक सुनो। चन्द्रमा देवताओंके साथ प्रभास नामक शुभ क्षेत्र में जायँ और वहाँ मृत्युंजय मन्त्र का विधिपूर्वक अनुष्ठान करते हुए भगवान् शिवकी आराधना करें। अपने सामने शिवलिंगकी स्थापना करके वहाँ चन्द्रदेव नित्य तपस्या करें। इससे प्रसन्न होकर शिव उन्हें क्षयरहित कर देंगे। तब देवताओं तथा ऋषियोंके कहने से ब्रह्माजी की आज्ञा के अनुसार चन्द्रमा ने वहाँ छ: महीने तक निरन्तर तपस्या की, मृत्युंजय मन्त्र से भगवान् वृषभध्वज का पूजन किया। दस करोड़ मन्त्रका जप और मृत्युंजयका ध्यान करते हुए चन्द्रमा वहाँ स्थिरचित्त होकर लगातार खड़े रहे। उन्हें तपस्या करते देख भक्तवत्सल भगवान्  महादेव प्रसन्न हो उनके सामने प्रकट हो गये और अपने भक्त चन्द्रमासे बोले।  

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महादेव जी ने कहा-चन्द्रदेव! तुम्हारा कल्याण हो; तुम्हारे मनमें जो अभीष्ट हो, वह वर माँगो! मैं प्रसन्न हूँ। तुम्हें सम्पूर्ण उत्तम वर प्रदान करूंगा।  चन्द्रमा बोले-देवेश्वर! यदि आप प्रसन्न हैं तो मेरे लिये क्या  असंभव  हो सकता है; फिर भी  प्रभो! शंकर! आप मेरे शरीर के इस क्षय रोग का निवारण कीजिये। मुझसे जो अपराध बन गया हो, उसे क्षमा कीजिये।

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महादेव जी ने कहा-चन्द्रदेव! एक पक्ष में  प्रतिदिन तुम्हारी कला क्षीण हो और दूसरे पक्ष में फिर वह निरन्तर बढ़ती रहे। तदनन्तर चन्द्रमा ने भक्ति भावसे भगवान् शंकरकी स्तुति की। इससे पहले निराकार होते हुए भी वे भगवान् शिव फिर साकार हो गये। देवताओं पर प्रसन्न हो उस क्षेत्रके माहात्म्यको बढ़ाने तथा चन्द्रमाके यश का विस्तार करने के लिये भगवान् शंकर उन्हीं के नामपर वहाँ सोमेश्वर कहलाये और श्री सोमनाथ के नामसे तीनों लोकों में विख्यात हुए।  श्री सोमनाथ का पूजन करने से वे उपासक के क्षय तथा कोढ़ आदि रोगोंका नाश कर देते हैं।  
somnath jyotirlinga story in hindi somnath jyotirlinga   story in hindi Reviewed by madhur bhakti on December 11, 2019 Rating: 5

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