त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी- trimbakeshwar story

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी trimbakeshwar Jyotirlinga story


त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी trimbakeshwar Jyotirlinga story

त्रयम्बकेश्वर महादेव की कहानी बड़ी की अद्भुत है त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना गौतम ऋषि द्वारा की गई थी 
त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र प्रान्त के नासिक  स्थित है।त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग  के दर्शन करने को लोग बड़ी दूर दूर से आते है और त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग  द्वादश ज्योतिर्लिंगों में आठवां ज्योतिर्लिंग है तो सुने त्रयम्बकेश्वर की कहानी 

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त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग  की  कहानी  शिवपुराण में इस प्रकार बताई गई   है  एक बार महर्षि गौतम के तपोवन में रहने वाले ब्राह्मणों की पत्नियाँ किसी बातपर उनकी पत्नी अहल्या से नाराज हो गयीं। उन्होंने अपने पतियों को
ऋषि गौतम का अपकार करने के लिये प्रेरित किया। उन ब्राह्मणों ने इसके निमित्त भगवान् श्री गणेशजी की आराधना की। उनकी आराधना से प्रसन्न हो गणेशजी ने प्रकट होकर उनसे वर माँगने को कहा। 

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उन ब्राह्मणों ने कहा-"प्रभो! यदि आप हमपर प्रसन्न हैं तो किसी प्रकार ऋषि गौतम को इस आश्रम से बाहर निकाल दें।" उनकी यह बात सुनकर गणेशजी ने उन्हें ऐसा वर न माँगने के लिये समझाया। किन्तु वे अपने आग्रह पर अटल रहे। अन्ततः गणेशजी को विवश होकर उनकी बात माननी पड़ी। अपने भक्तों का मन रखने के लिये वे एक दुर्बल गाय का रूप धारण करके ऋषि गौतम के खेत में जाकर चरने लगे। 

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी

गाय को फसल चरते देखकर ऋषि बड़ी नरमी के साथ हाथ में तृण ( धान, गेहूँ, जौ, राई आदि फसलों के डण्ठल ) लेकर उसे हाँकने के लिये भागे । उन तृणों का स्पर्श होते ही वह गाय वहीं मरकर गिर पड़ी। अब तो बड़ा हाहाकार मचा। सारे ब्राह्मण एकत्र हो गोहत्यारा कहकर ऋषि गौतम को दोष लगाने लगे। ऋषि गौतम इस घटना से बहुत आश्चर्य चकित और दुःखी थे। अब उन सारे ब्राह्मणों ने उनसे कहा कि तुम्हें यह आश्रम छोड़कर अन्यत्र कहीं दूर चले जाना चाहिये। 

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गोहत्यारे के निकट रहने से हमें भी पाप लगेगा। विवश होकर ऋषि गौतम अपनी पत्नी अहल्या  के साथ वहाँ से  दूर जाकर रहने लगे। किन्तु उन ब्राह्मणों ने  वहाँ भी आकर  परेशान करने लगे। वे कहने लगे-"गोहत्या के कारण तुम्हें अब वेद-पाठ और यज्ञादि के कार्य करने का कोई अधिकार नहीं रह गया है।" 

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अत्यन्त कातर भाव से ऋषि गौतम ने उन ब्राह्मणों से प्रार्थना की कि आप लोग मेरे प्रायश्चित्त और उद्धार का कोई उपाय बतावें। तब उन्होंने कहा-"गौतम! तुम अपने पाप को सर्वत्र सबको बताते हुए तीन बार पूरी पृथिवीकी परिक्रमा करो। फिर लौटकर यहाँ एक महीने तक व्रत करो। 

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी

इसके बाद ब्रह्मगिरि' की 101  परिक्रमा करने के बाद तुम्हारी शुद्धि होगी अथवा यहाँ गंगा जी को लाकर उनके जलसे स्नान करके एक करोड़ पार्थिव शिवलिङ्गों से शिवजी की आराधना करो। इसके बाद पुनः गंगा जी में स्नान करके इस ब्रह्मगिरि की 11  बार परिक्रमा करो। फिर सौ घड़ों के पवित्र जल से पार्थिव शिवलिङ्ग को स्नान कराने से तुम्हारा उद्धार होगा।" ब्राह्मणों के कथनानुसार महर्षि गौतम वे सारे कृत्य पूरे करके पत्नी के साथ पूर्णतः तल्लीन होकर भगवान् शिवकी आराधना करने लगे। 

त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग  

इससे प्रसन्न हो भगवान् शिवने प्रकट होकर उनसे वर माँगने को कहा। महर्षि गौतम ने उनसे कहा-"भगवन्! मैं यही चाहता हूँ कि आप मुझे गोहत्या के पाप से मुक्त कर दें।" भगवान् शिव ने कहा- "गौतम! तुम सदैव, सर्वथा निष्पाप हो। गोहत्या तुम्हें छलपूर्वक लगायी गयी थी। छलपूर्वक ऐसा करवाने वाले तुम्हारे आश्रम के ब्राह्मणों को मैं दण्ड देना चाहता हूँ।

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" गौतम ने कहा-'प्रभो! उन्हीं के निमित्त से तो मुझे आपका दर्शन प्राप्त हुआ है। अब उन्हें मेरा परमहित समझकर उनपर आप क्रोध न करें।" बहुत-से ऋषियों, मुनियों और देवगणों ने वहाँ एकत्र हो गौतम की बातका अनुमोदन करते हुए भगवान् शिव से सदा वहाँ निवास करनेकी प्रार्थना की। 

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वे उनकी बात मानकर वहाँ त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग  के नामसे स्थित हो गये। गौतमजी द्वारा लायी गयी गंगा जी भी वहीं पास में गोदा वरी नाम से प्रवाहित होने लगीं। त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग समस्त पुण्यों को प्रदान करने वाला है।
त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी पूर्ण हुईं 

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त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी- trimbakeshwar story त्रयम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग की कहनी- trimbakeshwar story Reviewed by madhur bhakti on January 03, 2020 Rating: 5

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